Pages

Sunday, January 11, 2009

बिहार भोजपुरी फ़िल्म सिटी बनी

कुछ फिल्मी सितारे और बिहार की सरकार इन दिनों बिहार में एक फिल्म सिटी बनाने को लेकर उद्यत हैं। वाकई यह बहुत अच्छी बात होगी अगर बिहार में कोई फिल्म इंडस्ट्री बन जाती है तो। फिल्में देखने का क्रेज बिहार में भी खूब है। खास तौर पर भोजपुरी फिल्में। लेकिन भोजपुरी फिल्में बनती मुंबई में हैं। आजकल भोजपुरी फिल्मों का सालाना टर्न ओवर 200 करोड़ को पार कर गया है। ऐसे में भोजपुरी फिल्मों से हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है। मजे की बात यह है कि भोजपुरी फिल्मों को आउटडोर लोकशन में शूटिंग बड़े पैमाने पर बिहार और यूपी में होती है। पर पोस्ट प्रोडक्शन का सारा काम मुंबई में जाकर होता है। जाहिर सी बात है कि इसमें हमारे मराठी भाइयों को भी भोजपुरी फिल्मों के कारण रोजगार मिलता है। लेकिन इन सबसे अलग हटकर बिहार में एक भोजपुरी फिल्म सिटी बननी ही चाहिए। क्यों .....क्योंकि तेलगू फिल्में हैदराबाद में बनती हैं। वहां कई स्टेट आफ द आर्ट स्टूडियो हैं। तमिल फिल्में चेन्नई में बनती हैं। बांग्ला फिल्में कोलकाता में बनती हैं। तो भला भोजपुरी फिल्में पटना में क्यों नहीं बननी चाहिए। इससे फिल्म से जुड़े लोगों को अपनी सेवाएं देने में आसानी होगी। किसी संघर्ष करने वाले गायक संगीतकार या गीतकार को भागकर मुंबई जाना और वहां स्ट्रगल नहीं करना पडेगा। उसको बक्सर से पटना ही तो जाना होगा। निश्चय ही यह अच्छी बात होगी।
फिल्म स्टार मनोज तिवारी ने इस मामले में पहल की है। उनकी पहल पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आगे आए हैं। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पर एक फिल्मसिटी बनाने की बात हो रही है। बिहार सरकार इसके लिए 200 एकड़ जमीन देने की बात कर रही है। यह बड़ा सुखद संकेत है। अगर पटना राजगीर रोड पर फिल्म सिटी बनती है तो बड़ी अच्छी बात होगी । शूटिंग के आउटडोर लोकेशन के लिए राजगीर बड़ी मुफीद जगह हो सकती है। राजगीर में जानी मेरा नाम जैसी लोकप्रिय फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है।
अगर बिहार में पोस्ट प्रोडक्शन का स्टूडियो होगा तो और फिल्म बनाने वालों को मौका मिलेगा। म्यूजिक वीडियो टीवी सीरियल की शूटिंग करने वालों को भी दिल्ली मुंबई का रूख नहीं करना पड़ेगा। मुझे तो लगता है कि भविष्य में बिहार में एक नहीं बल्कि कई स्टूडियो बनने चाहिए, और इतने स्तरीय स्टूडियो की मुंबई वाले भी अपना पोस्ट प्रोडक्सन का काम कराने के लिए बिहार का रूख करें। बिहार में फिल्मों के लिए तकनीकी टैलेंट की कमी नहीं है। बस उन्हें एक मौका देने की जरूरत है। अब मनोज तिवारी और भोजपुरी फिल्मों में अभय सिन्हा जैसे बड़े निर्माता इस क्षेत्र में आगे आ रहे हैं तो आगाज तो हो ही चुका है कुछ शुभ कार्यों के लिए....तो अंजाम भी अच्छा ही होना चाहिए.....

Saturday, January 10, 2009

ख्वाब

खुली ऑंख के ख्वाब सुहाने क्यों ये अचानक टूट गये /
ज़ीस्त मेरी थी जिनके सहारे अब ये सहारे टूट गये /
तेरे दम पर हमने फानूश तिरंगे मंगवाये /
तेरे सहारे ही ये हमने सुविधा के सामान जुटाये /
हुई खता आखिर क्या मेरी जो तुम ऐसे रूठ गये /
खुली ऑंख के ख्वाब सुहाने क्यों ये अचानक टूट गये /
तेरे इश्क में दीवाने हम रांझा से आगे निकले /
तुझको पाने की चाहत में पत्थर हैं वो भी पिघले /
स्याह अंधेरा हमें डराता तुम जो ऐसे रूठ गये /
खुली ऑंख के ख्वाब सुहाने क्यों ये अचानक टूट गये /
याद हमें है आज वो लम्हा जब आये थे पहली बार /
जर्रा जर्रा हुआ था रोशन आमद से मेरा घर द्वार /
सपनों की सी बातें लगती आप जो पहलू से हैं गये /
खुली ऑंख के ख्वाब सुहाने क्यों ये अचानक टूट गये /
तेरे बिना बैचेनी रहती नींद नहीं आ पाती है /
तेरा साथ है सबब है चैन का ज़ीस्त हंसी हो जाती है /
ऐसी भी ये क्या रूसबाई वादे तेरे झूठ हुये /
खुली ऑंख के ख्वाब सुहाने क्यों ये अचानक टूट गये /
बहुत हुई ये ऑंख मिचौली अब कुछ दिन तो रूक जाओ /
बने सियासी कठपुतली हो लेकिन अब ना तरसाओ /
बडे शहर तो हो चमकाते कस्बों से क्यों रूठ गये /
खुली ऑंख के ख्वाब सुहाने क्यों ये अचानक टूट गये /
नफा सियासी देने को तुम राजा के माशूक बने /
हम भी आशिक परले तेरे बिल पूरा हर माह भरें
मान भी जाओ बिजली देवी बिन तेरे न काम चले /
खुली ऑंख के ख्वाब सुहाने क्यों ये अचानक टूट गये /

दोस्त तेरी याद बहुत आती है ......

दोस्त तेरी याद बहुत आती है /
यादें तेरी या उन लम्हों की
जो बिताये थे तेरे साथ बचपन में /
आज भी ताजा हैं वे याद पचपन में /
दोस्त तेरी याद बहुत आती है /
स्कूल से गोल मार अमरूद के बगीचे में /
दौड्ते दौड्ते जामफ़ल तोडते /
माली का डर भी मन में भरा हुआ /
पेड से गिरने के डर से डरा हुआ /
यादें आज भी मन को हर्षाती हैं /
दोस्त तेरी याद बहुत आती है /
स्कूल के बाहर चाट के ठेले /
बेर कि डलिया और केले /
खाते खिलाते चिढाते खिलखिलाते /
पेड की छॊंव मे बैठे बतियाते /
बचपन की बातें भूल नहीं पातीं हैं
दोस्त तेरी याद बहुत आती है /

झामुमो चंपई सोरेन के नाम पर राजी

रांची : झामुमो विधायक दल के नेता चंपई सोरेन राज्य के अगले मुख्यमंत्री हो सकते हैं. झामुमो विधायक दल की शनिवार रात हुई बैठक में चंपई सोरेन के नाम पर सहमति बनी. हालांकि इसकी ओधकापरक घोषणा नहीं की गयी है. पर भू राजस्व मंत्री दुलाल भुइयां व सांसद टेकलाल महतो ने इसकी पुष्टि की है. चंपई सोरेन सरायकेला से विधायक हैं. विधायक दल की बैठक में शिबू सोरेन ने ही चंपई के नाम का प्रस्ताव रखा. चंपई के नाम पर विधायकों से हस्ताक्षर भी करवा लिये गये हैं.आलाकमान को अवगत करायेंगेबैठक के बाद मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने कहा कि झामुमो ने निर्णय ले लिया है. हालांकि उन्होंने नये मुख्यमंत्री के नाम का खुलासा नहीं किया. उन्होंने कहा कि रविवार को वह दिल्ली जायेंगे. दिल्ली में यूपीए आलाकमान को पार्टी के निर्णय से अवगत करायेंगे. इसके बाद फैसला यूपीए आलाकमान को करना है. शिबू ने कहा कि उन्हें इस्तीफा तो देना ही है, लेकिन पहले वह यूपीए आलाकमान को पार्टी के निर्णय से अवगत करायेंगे. इसके बाद ही नये सीएम के नाम को सार्वजनिक करेंगे. दिल्ली से लौटने के बाद इस्तीफा दे देंगे. उन्होंने कहा मेरे पपरवार का कोई सदस्य मुख्यमंत्री नहीं बनने जा रहा है. लेकिन झामुमो का ही कोई विधायक मुख्यमंत्री बनेगा. दुर्गा के नाम पर नहीं बनी सहमति :11दुर्गा के नाम पर नहीं बनी सहमतिरांची : इससे पहले मुख्यमंत्री शिबू सोरेन दिल्ली से लौटे. दोपहर बाद झामुमो की केंद्रीय कार्यकापरणी की बैठक शुरू हुई. बैठक में दुर्गा सोरेन, सुधीर महतो, नलिन सोरेन व सुशीला हांसदा के नामों पर चर्चा की गयी. बैठक में शिबू ने दिल्ली में यूपीए नेताओं के साथ हुई बातचीत का ब्योरा रखा. बैठक में दुर्गा सोरेन का नाम सबसे प्रमुखता से लिया गया. हालांकि उनके नाम पर सहमति नहीं बन पायी.झामुमो के पास ही रहे मुख्यमंत्री पदइसके बाद झामुमो विधायक दल की बैठक शुरू हुई. बैठक में सभी संभावित नामों पर फिर से चर्चा हुई. ओखरकार विधायकों ने चंपई सोरेन के नाम पर सहमति जता दी. साथ ही यह भी कहा गया कि शिबू सोरेन जिसका नाम चाहें, मुख्यमंत्री के लिए प्रस्तावित कर सकते हैं. बैठक में निर्णय लिया गया कि मुख्यमंत्री का पद झामुमो के पास ही रहेगा. अगर मुख्यमंत्री का पद नहीं मिला, तो झामुमो चुनाव में जायेगा.

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री आ गृहमंत्री के नांवे

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री आ गृहमंत्री के नांवे खुला चिट्ठी
बधाई राष्ट्रपति महोदया,
बधाई प्रधानमंत्री जी,
बधाई गृह मंत्री जी,
नया साल २००९ खातिर ढेर सारा बधाई.

इ बधाई खाली हमरे तरफ से नइखे. एह बधाई में शामिल बा संउसे दुनिया में फैलल, बिना डर-भय के शक्ति आ शान से रह रहल करोड़न भोजपुरिया भाई लोगन के मन के भाव आ अंतरात्मा के आवाज.
स्वीकार करीं...कुल्ह भोजपुरिया भाई के हार्दिक बधाई ...

दुनिया के सबसे बड़ा लोकतान्त्रिक देश के पहिला महिला राष्ट्रपति महामहिम श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल जी के नव वर्ष के बधाई देत आपन राजेन्द्र बाबू याद आ जात बाडन..महामहिम प्रतिभा जी, रौवा याद होइहन राजेन्द्र बाबू, उहे राजेन्द्र बाबू जे भारत के पहिला राष्ट्रपति चुनल गइलन.. राजेन्द्र बाबू भोजपुरिया माटी के सपूत रहलन, अइसन खांटी भोजपुरिया जे राष्ट्रपति भवन में भी आवेवाला भोजपुरिया लोगन से भोजपुरी में बतियावे में संकोच ना करत रहलन.

राष्ट्रपति महोदया, जब राजेन्द्र बाबू चह्तन त भोजपुरी भाषा के संवैधानिक मान्यता मिले में कौनो दिक्कत ना होइत. बाकिर ऊ अपना मातृभाषा के बजाय, राष्ट्रभाषा हिन्दी के मान्यता दिवावे के जादे जरुरी समझलन आ एह तरह से आपन राष्ट्रीय नेता होखे के पहिचान आ प्रमाण देहलन .. भोजपुरिया लोगन के करेजा भी उनकरे नियन विशाल रहल बा " देश पहिले, आपन समाज अउर संस्कृति बाद में ..

बाकिर एह देश के दूसर भाषा के लोग आपन भाषा के बारे में पहिले सोचले, राष्ट्रभाषा के बारे में बाद में. खैर - अब रास्त्रभाषा हिन्दी के पहिचान आ विकास के मसला नइखे रह गइल. हिन्दी के ओकर स्थान, पहिचान, सम्मान - कुल्ह मिल गइल. अब जरुरी बा कि भोजपुरी भाषा के ओकर स्थान, मान, सम्मान मिले...

राष्ट्रपति महोदया, रउवा अगर तनिको रूचि लेब त भोजपुरी भाषा के संबिधान के अठवां अनुसूची में शामिल करे में देरी ना होई .. अगर रउवा प्रयास से अइसन हो सकल त इ राजेन्द्र बाबू के प्रति राउर सच्चा श्रधांजलि आ संउसे दुनिया के भोजपुरिया लोगन के प्रति एतिहासिक योगदान होई. भोजपुरिया लोग राउर एह योगदान के कब ही ना भुला पइहन..

हम एह चिट्ठी के माध्यम से देश के सहज प्रधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह आ धीर गंभीर गृहमंत्री श्री पी चिदम्बरमो जी के नया साल के असीम शुभकामना देत निहोरा करब कि भोजपुरिया भाई लोगन के साथे न्याय करे में देर मत करीं......

प्रधानमंत्री जी, रउवा इतना करुण करेजा वाला सज्जन पुरूष बानीं कि 1984 के दंगा प्रभावित लोगन से माफ़ी मागे में इचको ना हिचिकिनी. एह से राउर कद अउर बढ़ गइल. लोग चाहे जवन कहे. सांच त ई बा कि रउवा प्रधानमंत्री के रूप में राजधर्म के पालन तमाम कठिनाई के बादो कर रहल बानी..एही से भोजपुरिया लोगन के भी भरोसा बा कि रउवा उनको साथे न्याय जरुर करब .. रउवा बिजी होखब, एह से याद दियावे खातिर इ चिट्ठी लिखत बानी. बड़ी बिनम्रता से हमनी के इ कहनाम बा कि जब एह देश में कुछ लाख लोगन के भाषा कोंकणी, डोगरी, बोडो आ मणिपुरी जइसन के संबिधान के अठवां अनुसूची में शामिल कर लिहल गइल त भोजपुरी के काहे नइखे शामिल कइल जात ?

रउवा मालूम बा कि भोजपुरी आज करोड़ों लोगन के मातृभासा हिया.. एकर पढ़ाई देश के ८ गो विश्वबिद्यालय में हो रहल बा, कई देशन में भोजपुरी लोग बहुत बड़ संख्या में बाड़े, आ बिदेस के अलावा भोजपुरी माटी के लोग अपनों देश के पहिला राष्ट्रपति से ले के राउर प्रधानमंत्री के कुर्सी तक पहुंच चुकल बाड़े....

रउआ अगर राष्ट्रभाषा हिन्दी के १० गो सर्वश्रेष्ठ साहित्यकार लोगन के नाम लेब त ओह में जादेतर असल में भोजपुरिये मिलिहन .. हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के मूल में भी अवधि के साथे भोजपुरी के महत्वपूर्ण स्थान बा .. भोजपुरी लोक संगीत के लोकप्रियता के बात दुनिया भर के लोग जानत बा.....

गुजरल साल २००८ में भोजपुरी भाषा के जलवा दुनिया के लोग देखलस. भोजपुरी सिनेमा अतना हिट होखे लगली स कि बड़ बड़ फिलिम स्टार अउर फिलिम निर्माता एह भाषा में आपन किस्मत आजमावे लगलन .. भोजपुरी सबके अपनवलस मान देहलस आ दामो देहलस .. एकर सफलता से उत्साहित लोग टीवी चैनल खोलले, राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्रिका निकलले. द सन्डे इंडियन के भोजपुरी संस्करण आ महुवा, हमार टीवी के साथे साथे कई गो भोजपुरी वेब साइट के मिल रहल सफलता भोजपुरी भाषा के लोकप्रियता के जियत जागत प्रमाण बा ..बाकि दुःख के बात ई बा कि एह भाषा के मान्यता के सवाल रउरो सरकार में लाल फीता शाही के शिकार हो गइल बा..एकर मान्यता देबे में रिजर्ब बैंक ऑफ़ इंडिया आ संघ लोक सेवा आयोग के आपति वाला तर्क भोजपुरिया लोगन के कंठ से नीचे नइखे उतरत. एकरा बहाना से एह भाषा के मान्यता देवे में देरी कइला से भोजपुरी भाषा भासी करोड़न लोगन के मन दुखी हो रहल बाड़े.एह साल कुछ महीना के बाद रउवा सभे के जनता के बीच जनादेश मांगे आवे के बा....

हमार निहोरा मानीं - "एह भाषा के मान्यता दीहीं" आ भोजपुरिया लोगन के आशीर्बाद ले के फेर राज काज चलाई .. बिस्वास बा कि रउआ हमनी के बिस्वास राखब .. इहे बा हमनी के नया साल के बधाई.

जिनगी रोज सवाल

एगो से निपटीं तले, दोसर उठे बवाल ।

केहू कतनो हल करी, ‘जिनिगी रोज सवाल’ ॥1॥

जिनिगी के दालान में का-का बा सामान ।

ख्वाब,पंख,कइंची अउर लोर-पीर मुस्कान ॥2॥

पाँख खुले त· आँख ना, आँख खुले त· पाँख।

एही से अक्सर इहाँ, सपना होला राख ॥3॥

रिस्ता-नाता, नेह सब, मौसम के अनुकूल ।

कबो आँख के किरकिरी, कबो आँख के फूल ॥4॥

‘भावुक’ अब बाटे कहाँ, पहिले जस हालात।

हमरा उनका होत बा, बस बाते भर बात ॥5॥

उनके के सब पूछ रहल, धन बा जिनका पास ।

हमरा छूछे भाव के, के डाली अब घास ॥6॥

पर्वत से निकलल नदी, लेके मीठा धार ।

बाकिर जब जग से मिलल, भइल उ खारे-खार ॥7॥

अब के आई पास में, पेंड़ भइल अब ठूँठ ।

‘भावुक’ दुनिया मतलबी, रिस्ता-नाता झूठ ॥8॥

हमरा कवना बात के, होई भला गरूर ।

ना पद, ना धन, ज्ञान बा, ना कुछ लूर-सहूर ॥9॥

तहरा से केतना लड़ीं, जब तू रहल· पास ।

बाकिर अब तहरे बिना, मन बा रहत उदास॥10॥

mai

अबो जे कबो छूटे लोर आंखिन से
बबुआ के ढॉंढ़स बंधावेलेमाई
आवे ना ऑंखिन में जब नींद हमरा त
सपनो में लोरी सुनावेले माई


बाबूजी दउड़ेनी जब मारे-पीटे त
अंचरा में अपना लुकावेलेमाई
छोड़ीना, बबुआ के मन ठीकनइखे
झूठहूं बहाना बनावेलेमाई


ऑंखिन का सोझा से जब दूर होनी त
हमरे फिकिर में गोता जालेमाई
आंखिन का आगा लवटि के जब आई त
हमरा के देखते धधा जालेमाई


अंगना से दुअरा आ दुअरा से अंगना ले,
बबुआ का पाछे ही धावेलेमाई
किलकारीमारत, चुटकीबजावत,
करि के इषाराबोलावेले माई


हलरावे, दुलरावे, पुचकारे प्यार से
बंहियनमें झुला झुलावेले माई
अंगुरीधराई, चले के सिखावत
जिनिगी के ´क-ख´ पढ़ावेले माई


गोदी से ठुमकि-ठुमकि जब भागी त
पकिड़ के तेल लगावेले माई
मउनी बनी अउरभुंइयालोटाई त
प्यार के थप्पड़ देखावेलेमाई

पास-पड़ोस से आवे जो ओरहन
कानेकनइठी लगावेले माई
बकी तुरन्त लगाई के छातीसे
बबुआके अमरित पियावेलेमाई

जरको सा लोरवा ढरकि जाला अंखिया से
देके मिठाई पोल्हावेले माई
चन्दाममा के बोला के, कटोरी में
दूध- भात गुट-गुट खियावेले माई


बबुआ का जाड़ा में ठण्डी ना लागे
तापेले बोरसी, तपावेले माई
गरमी में बबुआके छूटे पसेना त
अंचरा के बेनिया डोलावेलेमाई


मड़ई मेंभुंइयाभींजत देख बबुआ के
अपनेभींजे, नाभिंजावेले माई
कवनो डइनिया के टोना ना लागे
धागा करियवा पेन्हावेले माई


भेजे में जब कबो देर होला चिट्ठी त
पंडित से पतरा देखावेलेमाई
रोवेले रात, सूते नाचैन से
भोरे भोरे कउवा उचरावेलेमाई


जिनिगी के अपना ऊ जिनिगी ना बूझेले
´
बबुए नू जिनिगी´ बोलेलेमाई
दुख खाली हमरे ऊ सह नाहींपावेले
दुनिया के सब दुख ढो लेलेमाई

´जिनिगी के दीया´ ´ऑंखिन केपुतरी´
´बुढ़ापा केलाठी´ बतावेलेमाई
´हमरो उमिरिया मिल जाएहमरा बबुआ के´
देवता-पितरके गोहरावेले माई